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1.पंच पदी शिक्षा​ पद्धति​​​​​​

 

बालक के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षण की अनेक प्राचीन एवम अर्वाचीन विधियाँ है| शिक्षण से मनुष्य के ज्ञानात्मक, भावात्मक एवम क्रियात्मक संस्कारों का समन्वय होता है तथा उसके व्यवहार में परिवर्तन होता है ज्ञान से इच्छा का जागरण होता है और इच्छा मनुष्य को क्रियाशील बनाती है अर्थात् व्यवहार करती है| व्यवहार में परिवर्तन लाने को ही सीखना या अधिगम कहते है, यह सीखना ही शिक्षण प्रकिया है| 

इस शिक्षण की प्रकिया में तीन कारक निहित रहते है| प्रथम है बालक, जो कि इस प्रक्रिया का आधार विन्दु है, द्वितीय है विषय वस्तु जिसे कि वह सीखता है और तृतीय है शिक्षक जो सिखने में सहायता प्रदान करता है| बालक जन्म से ही अपरिपक्व होता है| अत: उसे इस प्रक्रिया के द्वारा शिक्षित कर परिपक्व बनाया जाता है|

 

सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षा के लिए पंचपदी का उपयोग किया जाता है| जिसके पांच पद निम्न है| 
१. अधीति ( अध्यापन )
२. बोध ( कक्षा कार्य )
३.  अभ्यास ( गृहकार्य ) 
४. प्रयोग ( सहायक क्रिया ) 
५.  प्रसार ( स्वाध्याय प्रवचन )

 

2. पाँच आधारभूत विषय

 

१. शारीरिक शिक्षा


बालक बलवान बने, बलिष्ठ बने, अच्छा खिलाड़ी बने, उसकी शारीरिक क्षमताओं का विकास हो, ऐसा बालक ही देश और धर्म की रक्षा कर सकेगा| विद्या भारती के सभी विद्यालयों में सभी बालक शारीरिक दृष्टि से विकास करें, यह प्रयास एवं व्यवस्था की जाती है| इसी दृष्टि से कक्षानुसार शारीरिक शिक्षा का पाठ्यक्रम विशेषज्ञों ने बनाया है| शारीरिक शिक्षा का विशेष प्रशिक्षण देने के लिए क्षेत्रशः केंद्र स्थापित किये गए हैं| विद्या भारती राष्ट्रीय खेल-कूद परिषद् का गठन किया जा रहा है|


२. योग शिक्षा


योग विद्या भारती की प्राचीन विद्या है| विश्व भर में इसको अपनाया जा रहा है| विद्या भारती का प्रयत्न है कि हमारे सभी बालक-बालिकाएं योगाभ्यासी बनें| योग के अभ्यास से शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास उत्तम रीति से होता है - यह विज्ञान से एवं अनुभव से सिद्ध है| प्रत्येक प्रदेश एवं क्षेत्र में योग शिक्षा केंद्र स्थापित किये हैं| जहाँ प्रयोग एवं आचार्य प्रशिक्षण के कार्यक्रम चलते हैं| एक राष्ट्रीय स्तर पर भी योग शिक्षा संस्थान स्थापित करने की योजना विचाराधीन है|


३. नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा


बालक देश के भावी कर्णधार हैं| उनके चरित्र बल पर ही देश कि प्रतिष्ठा एवं विकास आधारित है| अतः नैतिकता, राष्ट्रभक्ति आदि मूल्यों की शिक्षा और जीवन के आध्यात्मिक दृष्टिकोण का विकास करने हेतु विद्या भारती ने यह पाठ्यक्रम बनाया है| यह समस्त शिक्षा प्रक्रिया का आधार विषय है| भारतीय संस्कृति, धर्म एवं जीवनादर्शों के अनुरूप बालकों के चरित्र का निर्माण करना विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली का मुख्य लक्ष्य है|


४. संस्कृत भाषा


संस्कृत भाषा की ही नहीं विश्व कि अधिकांश भाषाओँ की जननी है| संस्कृत साहित्य में भारतीय संस्कृति एवं भारत के प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की निधि भरी पड़ी है| संस्कृत भाषा के ज्ञान के बिना उससे हमारे छात्र अपरिचित रहेंगे| संस्कृत भारत की राष्ट्रीय एकता का सूत्र भी है| विद्या भारती ने इसी कारण संस्कृत भाषा के शिक्षण को अपने विद्यालय में महत्वपूर्ण स्थान दिया है| विद्या भारती संस्कृत विभाग कुरुक्षेत्र में स्थित है| इस विभाग ने सम्भाषण पद्धति के आधार पर "देववाणी संस्कृतम" नाम से पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है| संस्कृत के आचार्यों का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इस विभाग के द्वारा संचालित होता है|


५. संगीत शिक्षण


संगीत वह कला है जो प्राणी के हृदय के अंतरतम तारों को झंकृत कर देती है| उदात्त भावनाओं के जागरण एवं संस्कार प्रक्रिया के माध्यम के रूप में संगीत का शिक्षण विद्या भारती के सभी विद्यालयों में सारे देश में चलता है| उच्च स्तर के गीत कैसेट तैयार कराए गए हैं| राष्ट्र भक्ति के गीतों का स्वर पूरे भारत में गूंजता है| जन्मदिवस के उत्सव हेतु गीत-कैसेट तैयार कराया है जो घर-घर में बजता है| संगीत शिक्षण का कक्षानुसार पाठ्यक्रम निर्धारित है| सभी भारतीय भाषाओँ में गीत छात्रों में प्रचलित हैं| भाषायें भिन्न हैं किन्तु भाव एक हैं| यह अनुभूति होती है


 

3. विद्या भारती संस्कृति बोध परियोजना

      इसके अंतर्गत तीन कार्यक्रम संचालित होते है -

 

१. अखिल भारतीय संस्कृत ज्ञान परीक्षा

 

यह परीक्षा 1980 से विद्या भारती के कुरुक्षेत्र केंद्र से संचालित की जाती है इसके माध्यम से छात्रों  को भारतीय संस्कृति, धर्म, इतिहास, पर्वो, तीर्थस्थलो, पवित्र नदियों - पर्वतो एवं राष्ट्रीय महाप्रुषो की जानकारी अत्यंत रोचक एवं सहज रूप में प्राप्त हो जाती है| इस  योजना का लाभ विद्या भारती के अतिरिक्त अन्य विद्यालयों के छात्र, अध्यापक, माता - पिता आदि सर्वसाधारण लोग प्राप्त कर रहे है| भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता को पुष्पित एवं पल्लवित करने में यह योजना पोषक सिध्द हो रही है| 

 
२. संस्कृत ज्ञान परीक्षा (आचार्यों के लिए)

 

आचार्यों हेतु भी संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रवेशिका, मध्यमा, उत्तमा एवं प्रज्ञा इन चार स्तरों पर आयोजित की जाती है जिससे की आचार्यों को 
भी उपर्युक्त विषयों का ज्ञान हो सके| सामान्यतया प्रचलित शिक्षा प्रणाली हुए युवक अपने धर्म, संस्कृति, इतिहास आदि विषयों के सामान्य ज्ञान में भी शुन्य होते हैं| उनके विकाश में यह योजना प्रभावी सिध्द हो रही है|

 

३. प्रश्न मंच कार्यक्रम

 

प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के अलग - अलग समूहों के लिए प्रश्न मंच कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित किया जाता है एवं अत्यंत रोचक कार्यक्रम होता है, जिसके माध्यम से छात्र अपनी पुण्य भूमि भारत, इतिहास एवं सांस्कृतिक विषयों का परिचय सहज रूप से प्राप्त कर लेते है|
 

४. निबंध प्रतियोगिता

 

यह कार्यक्रम अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित किय जाता है| इसका आयोजन प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर स्तर के छात्रों  एवं  आचार्यों के लिए अलग - अलग होता है| अपने - अपने समूह में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए जाते है|
निबंध के विषय वि पुण्य भूमि भारत, इतिहास, ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र के महापुरुष एवं भारतीय संस्कृति से सम्बंधित होते है|

 

4. संस्कार केंद्र योजना

 

विद्यालय के द्वारा समाज के उपेक्षित बस्तियों में निःशुल्क संस्कार केन्द्र संचालित किये जाते है। वर्तमान में कुल 6 संस्कार केंद्र चल रहे है। इन संस्कार केन्द्रों पर बालक-बालिकाओं के लिए शिक्षा और संस्कारों की व्यवस्था रहती ही है, साथ ही इनके माता-पिता एवं परिवारजनों में भी अनौपचारिक एवं संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से स्वस्थ, सुसंस्कृत,व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन की चेतना जागृत की जाती है।

प्रयोगशाला

 

भौतिक, रसायनशास्त्र एवं जीवविज्ञान की उपकरणों से सुसज्जित अलग-अलग प्रयोगशाला

भौतिक प्रयोगशाला

 

आवश्यक उपकरण से युक्त भौतिकी प्रयोगशाला में भैया/बहन भौतिकी की प्रायोगिक कार्य करते है।

रसायन प्रयोगशाला

 

आधुनिक उपकरण से सुसज्जित रसायन प्रयोगशाला है जहाँ भैया/वहन व्यवस्थित ढंग से रसायन विज्ञान की प्रायोगिक कार्य करते हैं।

जीवविज्ञान प्रयोगशाला

 

विद्यालय में जीव विज्ञान की सुव्यवस्थित प्रयोगशाला है जिसमें 25 भैया/बहन व्यवस्थित ढंग से प्रायोगिक कार्य कर सकते है। प्रयोगशाला में ही स्मार्ट क्लास की भी व्यवस्था की गई है जिसके माध्यम से विषय का अध्यापन कराया जाता है।

कंप्यूटर लैब

 

वर्तमान कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी के युग में भैया/बहनो को कक्षा चतुर्थ से ही कम्प्यूटर का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाता है। जिससे उनमें प्रतिभा, कौशल एवं तर्कसंगत सोच का विकास हो सके और आधुनिक मीडिया युग में पिछड़े नहीं।

संगीत प्रयोगशाला

 

संगीत आत्मा की भाषा है और नृत्य हमारी भावनाओं एवं खुशियों की अभिव्यक्ति है। विद्यार्थियों की संगीत-प्रतिभा को उजागर करने के लिए और उनमें उत्पन्न तनाव को दूर करने के लिए बहुत से वाद्यंयत्र जैसे- कांगो, केसियो, हारमोनियम, तबला, ढोलक, बांसुरी, वायलिन और गिटार आदि उपलब्ध है। विद्यालय के पास एक प्रशिक्षित बैंड ग्रुप भी है।

पुस्तकालय

 

पुस्तकालय में सभी विषयों पर पुस्तकों की एक वृहद संग्रह है। प्रतियोगी दुनिया में भैया/बहनों को ज्ञान के साथ मन को समृद्ध बनाने का कार्य पुरकालय द्वारा किया जा रहा है।